आज तुम्हारी बातों ने फिर, हृदय हमारा तोड़ा है
फिर से तेरे कुछ लफ्जों ने, उसी दौर से जोड़ा है।
याद करो सावन से पुष्पित, उन मनुहारे कथनों को
याद करो स्वप्नों से लक्षित, उन पश्चात्तापी वचनों को।
नहीं कोई अब लक्ष्य बचा है, ना कोई अभिलाषा है
नहीं रहा अस्तित्व कोई अब, ना कोई परिभाषा है।
फिर से तेरे कुछ लफ्जों ने, उसी दौर से जोड़ा है।
याद करो सावन से पुष्पित, उन मनुहारे कथनों को
याद करो स्वप्नों से लक्षित, उन पश्चात्तापी वचनों को।
नहीं कोई अब लक्ष्य बचा है, ना कोई अभिलाषा है
नहीं रहा अस्तित्व कोई अब, ना कोई परिभाषा है।