वो प्यारा सा अहसास, अब भी दिल के पास है
वो नवंबर की मुलाकात, आज भी हमको याद है
शरमा के तेरा, मेरी बाहों में बिखर जाना
और जकड़कर मुझको, अपने सीने से लगाना
फिर तेरी खामोश निगाहों में मेरा समा जाना
ये नवंबर याद दिलाता है, तेरे लहजे का सर्द हो जाना
बिछड़ जाने का डर, मिलन की आस लगता है
यही वजह है, जो नवंबर इतना खास लगता है।
तू क्यों बिछड़ी, नहीं अब याद है लेकिन
बस इतना याद है, वो महीना नवंबर था
वो नवंबर की मुलाकात, आज भी हमको याद है
शरमा के तेरा, मेरी बाहों में बिखर जाना
और जकड़कर मुझको, अपने सीने से लगाना
फिर तेरी खामोश निगाहों में मेरा समा जाना
ये नवंबर याद दिलाता है, तेरे लहजे का सर्द हो जाना
बिछड़ जाने का डर, मिलन की आस लगता है
यही वजह है, जो नवंबर इतना खास लगता है।
तू क्यों बिछड़ी, नहीं अब याद है लेकिन
बस इतना याद है, वो महीना नवंबर था