Wednesday, 10 August 2016

जो तुमने विश्वास भरा...

जीवन के इस कठिन दौर में, जबसे तुमको पाया है
प्रेम पुंज का सूर्य रूप तब, उतर धरा पर आया है।

थी मेरी बस यही कामना, जीवन का आधार बनो तुम
अमिट छाप देकर अतीत की, फिर मेरा संसार बनो तुम।

उस अंबर की परंपरा से, जैसे चांद विरह करता है
तोड़ अमावस की बेड़ी को, पुनः नया यौवन भरता है।

वसुंधरा की इस माटी में, जैसे अप्रतिम प्रेम धरा
धरा रह गया मन में तब वह, जो तुमने विश्वास भरा।

प्रीति-नीति के चक्रों को भी, तोड़ तुम्हें अपनाता हूं
अखिल विश्व का गौरव बनकर, नई कहानी गाता हूं।

No comments:

Post a Comment