Tuesday, 30 January 2018

कहानी उस रात की

थी अजब सी कहानी, भी उस रात की
खोकर उसी में, भी छलकी थी तुम

प्रेम कुंदन के मदमस्त, अश्रु जल तले
डूब उसमें, मोहब्बत सी बरसी थी तुम

थीं विधाएं सरस, राग जैसी वही
बर्फ जैसी वहीं, पिघली थी तुम

प्रीति की वह सुधा, याचना सीप सी
सो गई रात थी, खूब जागी थी तुम

चूढ़ियों की खनक, और हृदय की कसक
नेह स्पर्श में, मुस्कुराई थी तुम

प्रश्न था हर्ष का, मन में संघर्ष था
सिलवटों में प्रथम, वह उत्कर्ष था

मुक्तिधामों के उन, आसरों में बंधे
चाहतों के शिविर में, छाई थी तुम

थी अजब सी कहानी, भी उस रात की
हार के क्षार से, विदाई थी तुम

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