Saturday, 16 September 2023

बेटियां

 चहक महक से भरतीं घर को, हैं खुशियों का त्योहार

बेटियां ईश्वर का उपहार, बेटियां ईश्वर का उपहार


उनके चरणों में स्वर्ग, धरा पर मात - पिता का सर्ग

मुस्कान भी ऐसे जैसे, बनकर आईं पालनहार

बेटियां ईश्वर का उपहार, बेटियां ईश्वर का उपहार


आंखों में संसार, कि जैसे नहीं कोई उस पार

एक बार जो देखें प्यार से, हो कष्टों का संहार

बेटियां ईश्वर का उपहार, बेटियां ईश्वर का उपहार


उंगली की पहली पकड़न वो, जैसे मां से एकाकार 

हाथ फिरें जब माथे पर तो लगें वे तारणहार

बेटियां ईश्वर का उपहार, बेटियां ईश्वर का उपहार

Thursday, 16 September 2021

एक गजल अहंकार के नाम

 वो कहता है कि औरों की तरह हम भी तेरे तलवे चाटें,
पर सुन, मेरा जमीर तेरी करतूतों का सहारा नहीं बनता

मेरी त्योरियां चढ़ती हैं तेरी नाकामियों पर
सुन! तू बेपरवाह है, सब देखते रहे अंधों से मेरा रिश्ता नहीं जमता

सुन! तू खेलता बहुत है हमारी खुशियों से,
मैं भी इरादे का पक्का हूं, मुस्कुराना नहीं छोड़ूंगा।

तुम्हारी नाकाबिलियत पर भी खामोश बैठूं
सुन, इंसान हूं, पत्थर की मूरत नहीं हूं मैं।

तू सोचता है कि सच की दुकान में झूठ बेचेगा
सुन, तेरा माल चीनी है, वो मकानों में ज्यादा नहीं टिकता

अवसाद, विचलन, अतीत के तिमिर को हराकर यहां पहुंचा हूं
सुन, यूं खुलेआम झूठ फैलाने का कारखाना नहीं चलने दूंगा

माना कि ताकत में है तू, खुदा भी समझता है खुद को,
पर सुन! तेरे कदमों में गिरकर सच का उजाला नहीं रुकने दूंगा

मैं जानता हूं, फिलहाल वक्त बुरा है मेरा
सुनो, नींद से उठने दो, फिर हर फैसले का हिसाब लूंगा

Sunday, 28 April 2019

नयन सेज पर एक स्वप्न है...

जब तक भोली जनता को, वे छल से शांत कराएंगे
तब तक बन रण के कान्हा हम, गीता का पाठ पढ़ाएंगे

वे मूर्ख समझकर हम सबको, नैसर्गिक झूठ दिखाते हैं
आनंद भाव से सत्य मानकर, हम उनके ही गुण गाते हैं

आडंबर वाली वे रस्में, अब और नहीं सह पाएंगे
अनुकूल रहे हम सदा सत्य के, स्फूर्ति पुनः वह लाएंगे

सत्ता के चरण पखार हमें, ना पुरस्कार की आशा है
बस बने प्रतिष्ठा भारत की, अभियोग सभी सह जाएंगे

नयन सेज पर एक स्वप्न है, आर्य पुनः हम बन जाएं
तुम छेड़ोगे यदि इसको तो, अरिहंत रूप अपनाएंगे

हैं शिव हमारे हर कदम में, विषपान से घबराते नहीं
हो तिमिर यदि गृहकलश में, चुप बैठ हम पाते नहीं,
स्वयं जलकर उस अंधेरे का सुखद वध हम करेंगे
प्राणदानी, ब्रह्म दीपक, बन सदा यूं ही जलेंगे।

मिली जब से तुम

प्रेम बनकर मुझे हो मिली जबसे तुम,
लगता जैसे कि जीवन सफल हो गया

बंधनों के ही खंडन की वह एक कथा,
दूर जाने के डर की अजब सी व्यथा
अनगढ़े अनकहे मोतियों की सिसक
पूर्ण कर दी हृदय में बसी वह कसक

प्रेम की इस धरा में तुम्हीं हो प्रथम
बन के राधा मेरी, तुम बना लो किशन

दीप जलते रहें, शब्द बनते रहें
छांव वृक्षों तले, हम भी पलते रहें
मन भी तब शांत हो, ना ही सूत्रान्त हो
प्रेम की इस कहानी को आयाम दो

Sunday, 11 November 2018

मेरी कामना

उस विषमता भावना ने, खंडित किया वैदूर्य सा
नेह के स्पर्श मन में, स्वर हुआ वह तूर्य सा

उन व्यथाओं की कसक से, पूर्य वांछित रह गया था
देह जूठी, प्राण पावन, सूर्य तब कलुषित हुआ था

क्या मिलन था उस घड़ी में, डूब कर खोए थे तुम
उस विकलता की घड़ी में, हार कर सोए थे हम

था हमारा स्वप्न कि तुम, चिर जियो अर्धांगिनी बन
मौन होकर आलिंगनों में, फिर बनो वामांगिनी तुम

किंतु देखो चाह मेरी, सत्य से बिल्कुल अलग थी
छल था बस उसमें बसा वह, जीव से बिल्कुल विलग थी

है यही बस कामना अब, आवरण समृद्ध हो
तुम तो मेरी हो न पाई, प्रेम अब अनिरुद्ध हो...

Saturday, 3 November 2018

मैं तुम्हें जब खोजता हूं

निशा के अंतिम पहर में, मैं तुम्हें जब खोजता हूं
राह की वीरानियों में, मैं तुम्हें जब सोचता हूं

सूर्य की अथ दीप्ति सी तुम, प्रीत का त्योहार हो तुम
नीर लेकर मैं नयन में, कह रहा विस्तार हो तुम

तुम तुम्हारे ही हृदय की, एक अविचल कामना हो
प्रेम परिचारक जनों की , तुम कुटिल अवमानना हो

जिस जलधि में अनगढ़े से मोतियों की ज्वार धारा
छद्म कलुषित अर्णवों में, जीव जीता मर न पाया
उस उदधि की चारुता से, शर्बरी से, नेह कर बैठा हूं मैं
इस प्रणय पर नीरदों की, वृष्टि में बहता हूं मैं

कामनाओं की धरा पर, प्रीत की अनुभूति थी तुम
योग के आनन्द की, ही प्रथम संभूति थी तुम
आसक्त थी मुझको तुम्हारी, मधुमास सी उस रम्यता से
किंतु छल से बच न पाया, दंभ निर्मित जन्यता से।

Sunday, 28 October 2018

कौन हो तुम

गृहशोभा की प्रथम किरण हो, प्रज्ञा हो अभिलाषा में
प्रेम, समर्पण, निष्ठ भाव की, अर्थ तुम्हीं परिभाषा में

अंबर का विस्तार तुम्ही हो, सागर सी गहरी हो तुम
वैकल्पिक तुम मार्ग नहीं हो, निशा स्वप्न की प्रहरी तुम

जीवन का तुम अटल सत्य हो, मृगनयनी कस्तूरी हो
प्रेम भावना अर्पण हो तुम, नवरस की तुम धुरी हो...