विश्वगुरू बन पदम् प्रतिष्ठा को वापस लेकर आएं
अहम् छोड़कर 'राष्ट्रवाद' को जीवन का आधार बनाएं।
राष्ट्र प्रथम है इसी भाव से स्वजन में विश्वास जगाएं
नहीं कोई अब मन्दिर टूटे, मस्जिद का संत्रास मिटाएँ।
सबने कष्ट सहे हैं रण में, इसे मान कर चलना है
सबने जीवन युद्ध लड़ा है, यही भान कर बढ़ना है।
अहम् छोड़कर 'राष्ट्रवाद' को जीवन का आधार बनाएं।
राष्ट्र प्रथम है इसी भाव से स्वजन में विश्वास जगाएं
नहीं कोई अब मन्दिर टूटे, मस्जिद का संत्रास मिटाएँ।
सबने कष्ट सहे हैं रण में, इसे मान कर चलना है
सबने जीवन युद्ध लड़ा है, यही भान कर बढ़ना है।
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