Friday, 15 April 2016

कैसी थी वे रातें...

कैसी थी वे आँखे जिनसे तेरे आंसू बहते थे
कैसी थी वे रातें जिनमें तुमसे दूरी सहते थे।

रही नहीं वो बातें जिनमें जिक्र तुम्हारा होता था
हुआ नहीं वह प्रेम पल्लवित जो तुझमें ही फलता था।

वही लफ़्ज सन्देश बने अब, वही प्रेम की बातें हैं
वही भाव समर्पित होकर, डोर वेदना थामे है।

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